गिरते भूजल स्तर से जल संरक्षण विशेषज्ञ चिन्तित

जयपुरJaipur , 30 जनवरी । प्रदेश में भूजल Ground Water  के गिरते जल स्तर और गुणवत्ता पर गहन विमर्श व इसके स्थायी समाधान के लिये जलग्रहण विकास एवं मृदा संरक्षण आयुक्तालय, विन्सटन सिडनी यूनिवर्सिटी एवं मालवीय राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ’’ग्राउन्ड वॉटर मॉनिटरिगं, प्लानिगं, रिचार्ज एण्ड सस्टेनेबल यूजः विपेज लेवल पार्टिसिपेटरी अप्रोचेज एण्ड टूल्स’’ पर जल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों की एक दिवसीय कार्यशाला बुधवार को एमएनआईटी संस्थान में आयोजित की गई ।


कार्यशाला में भूजल संरक्षण, वर्षा जल संरक्षण व भूजल की जानकारी से जुड़े देश - विदेश के 70 प्रमुख विशेषज्ञों, इंजिनियर्स, योजनाकारों, विश्व बैंक, नाबार्ड, अनुसंधान संस्थाओं व स्वंयसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया ।

 

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  राजेश्वर सिंह ने कहा कि प्रत्येक जीव के सम्पूर्ण जीवन निर्वाह के लिए जल आधारभूत प्राकृतिक संसाधन है । जल के बिना भूमण्डल पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती ।

 सिंह ने कहा कि हमारे पूर्वज बहुत दूरदृष्टा थे व जल की जीवन में क्या महत्ता है इसकी गहरी समझ रखते थे यही कारण है कि सभी सभ्यताएं एवं प्राचीन नगर नदियों व जल स्त्रोतों के करीब ही विकसित व समृद्ध होकर सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी।

 

उन्होंने कहा कि प्रदेश की अधिकांश पंचायत समितियों व ब्लॉक्स में भूजल का अत्यधिक दोहन होने से आगामी समय जल की उपलब्धता की दृष्टि से ओर कठिनाई भरा होगा। इसलिए सभी सम्बद्ध पक्षों को जल संरक्षण के लिए  दीर्घकालिक रणनीति से कार्य करना होगा।

 

 सिंह ने कहा कि पूर्व में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के तहत 12 हजार गांवों में जल संरक्षण का कार्य हुआ । अब राज्य सरकार ने राजीव गांधी जल संचय योजना के तहत आमजन की व्यापक भागीदारी व श्रमदान से 4 हजार गांवों में जल संरक्षण का कार्य करवाने का निर्णय लिया है ।उन्होंने जल संग्रहित वर्षा जल से बढ़े भूजल की सतत्ता बनाए रखने के लिए व कृषकों द्वारा जल उपयोग प्रबन्धन हेतु ग्रामीणों को जोड़ने पर जोर दिया।

 

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए एमएनआईटी के निदेशक  उदय कुमार यारागट्टी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं, अनुसंधान केन्द्रों, विश्वविधालयों द्वारा अपने अनुसंधान को आम कृषक तक पहुंचाने के लिए सरकार के साथ समन्वय कर कार्य करना होगा ।