इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ओन ग्लोबलाइजेशन ऑफ खादी


जयपुरJaipur , 31 जनवरी। चाहे सर्दी हो या गर्मी या बरसात खादी ऐसा वस्त्र है जिसे सभी मौसम में पहना जा सकता है।
 एक समय था जब गांवों में घर घर में चरखा होता था तो बच्चों को स्कूलों में तकली से कताई सिखाई जाती थी। हांलाकि आज वस्त्र की दुनिया में तेजी से बदलाव आया है पर इको फ्रैण्डली होने के कारण देष विदेष में खादी की तेजी से मांग बढ़ती जा रही है। कातिनों और बुनकरों को मेहनत का पूरा पैसा नहीं मिलने से धीरे धीरे गांवों में घरों से चरखे गायब हो गए तो आज की पीढ़ी ने धीरे धीरे इस काम से मुंह मोड़ लिया।
खादी की प्रासंगिकता आज और अधिक हो गई है। आवष्यकता है तकनीक में सुधार की, बाजार की मांग के अनुसार खादी वस्त्रों को आकार देने की। आजादी के समय खादी वस्त्र ही नहीं होकर विचार के साथ ही स्वाभिवान का प्रतीक रही है। ऐसे में खादी के वैष्वीकरण के लिए इस क्षेत्र में कार्य कर रहे सभी लोगों के साथ ही फैषन डिजाइनरों को नई तकनीक और एग्रेसिव मार्केटिंग के साथ आगे आना होगा।


यह विचार राज्य के उद्योग विभाग, खादी एवं ग्रामोद्योग, एचसीएम रीपा और सीआईआई द्वारा कल से शुरु हुई दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ओन ग्लोबलाइजेशन ऑफ खादी में तकनीकी सत्रों में उभर कर आए।
 दरअसल खादी को प्रमोट करने के लिए सभी को संयुक्त प्रयास करने होंगे। इसके लिए डिमाण्ड और सप्लाई चैन को विकसित करना होगा। ऐसा नहीं है कि यह हो नहीं सकता। एसीएस उद्योग डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने इस साल खादी वस्त्रों पर 50 फीसदी की छूट दी तो खादी वस्त्रों के अब तक के बिक्री के सारे रेकार्ड टूट गए। जहां केवल करोड़ दो करोड़ रु. की छूट राजकीय बजट से जाती थी वह 17 करोड़ का पार कर चुकी है और वित्तीय वर्ष के अंत तक यह दोगुणी हो जाने की संभावना है।
आईपीई ट्र्पिल लाईन लंदन के एसोसिएट लारेंा स्वैल ने कहा कि खादी को प्रमोट करने के लिए बिजनस मॉडल विकसित करना होगा। फैशन डिजाइनर हिम्मत सिंह ने कहा कि उन्होंने विदेश में खादी टोपी से लेकर जूते तक तैयार कर विदेश में फैशन शो किए और इसे यूएस में हाथोंहाथ लिया। उन्होंने कहा कि दरअसल आर्टिजन से जुड़ाव होगा तो खादी को लेकर के फैशन की दुनिया में नया करके आ सकेंगे।
आयोजन समिति के संयोजक गिरधारी सिंह बाफना ने कहा कि आजादी के बाद यह पहला मौका है जब हमारे देश में पहली बार खादी को लेकर अंतरराष्ट्र्ीय कॉफ्रेंस आयोजित की गई है। 50 प्रतिशत छूट का भी राज्य सरकार की प्रतिवद्धता का ही परिणाम है। इसका आयोजन भी खादी को प्रमोट करना है।


गांधीवादी विचारक भवानी शंकर कुसुम ने कहा कि हमें कपास की बिजाई से लेकर कताई-बुनाई तक को जोड़ना होगा। खादी में नई रिसर्च और तकनीक को अपनाना होगा। दरअसल आज सबसे अधिक आवष्यकता नई पीढ़ी को खादी की विविध आयामों से जोड़ने की है। खेती के साथ कताई बुनाई आय का साधन रहा है और इसे प्रोत्साहित करने की आवष्यकता है।
एचसीएम रीपा ओटीएस के निदेशक अश्वनी भगत ने नेचूरल औरगनिक फाइबर सेशन का संयोजन करते हुए कहा कि खादी की अपनी पहचान है। आज आरगनिक कॉटन सीड पर काम हो रहा है। प्राकृतिक रंगाई कला को नए सिरे से परिभाषित करने की आवष्यकता है। जेएस इण्डस्ट्र्ी शुभम चौधरी ने कहा कि खादी अपने आप में अनेक प्रष्नों का उत्तर लिए हुए हैं।
इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ओन ग्लोबलाइजेशन ऑफ खादी के पहले दिन के चार सत्रों में इण्डियन खादी स्टोरी सत्र में खादी संस्थान के अध्यक्ष इन्दु भूषण गोयल, एसोसिएट खादी सीआईसी आषा बूच, डॉ. पुष्पेन्द्र दुबे, अघ्यक्ष ग्राम सेवा मण्डल सुश्री करुणा फुताने, अकोला के प्रयोगषील किसान प्रहलाद निम्हाडे और सचिव खादी बोर्ड हरिमोहन मीणा ने विचार व्यक्त किए। 
ग्लोबल एथिकल एण्ड सस्टेनेबल फैषन कंसेप्ट एण्ड डिजाइन सत्र को खादी गामोद्योग संस्थान के अध्यक्ष रामदास शर्मा, निदेषक एनआईएफटी जोधपुर डॉ. विजया देषमुख, आर्च कॉलेज की अर्चना सुराणा, श्रमदान के अमित जैन, प्रषांत ग्रुफ के एमडी प्रकाष शाह, आदि ने भी संबोधित करते हुए विभिन्न पक्षों को रखा।
नेचुरल ऑन ओरगनिक फाइबर में आर्गेनिक फार्मिंग के स्वामीनाथन वी, जत्न ट्र्स्ट के कपिल शाह, लेडी बैगफोर्ड फाउण्डेशन सुश्री जुही पाण्डेय एनआईडी के अमित सिन्हा आदि ने विभिन्न पक्षों पर विचार व्यक्त किए।