संक्रांति: शुभ फलों की प्राप्ति व दुष्प्रभावों को कैसे करे कम


गलतापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशाचार्य महाराज ने शुभ फलों की प्राप्ति व दुष्प्रभावों को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय बताए :-
1. संक्रांति के समय ( 14 जनवरी से 15 जनवरी की रात्रि में 2:08 बजे ) में जागरण करें।
2. संक्राति के समय तीर्थों में स्नान तत्पश्चात हवन, जप आदि कार्य विशेष फलप्रद होते हैं।
3. जल में काले तिल को डालकर स्नान करें।
4. काले तिल व उससे बने व्यंजनों का दान करें।
5.  बुध का विशेष प्रभाव होने के कारण साबुत  हरी मूँग का दान, गायों व अन्य पशुओं को हरा चारा, पालक आदि खिलाना, पक्षियों को दाना डालना, कंबल आदि का दान विशेष फलप्रद रहेगा।
6. विद्याध्ययन तथा आध्यात्मिक ज्ञान में अभिवृद्धि करने वाली पठनीय सामग्री का वितरण श्रेयस्कर होगा।
7. विशेष दान के अतिरिक्त स्वयं की इच्छा व भावना से किये गए सभी प्रकार के दान भी फल देते हैं।


विशेष : संक्रांति के समय से अगले 9 घंटे तक पुण्यकाल रहता है, इस अवधि में ही उपरोक्त ये सभी कार्य किये जाने चाहिए।