सांभर झील क्षेत्र में प्रभावी कार्यवाही एवं निगरानी रखने हेतु कमेटी का गठन


जयपुर, 14 फरवरी। वन राज्य मंत्री  सुखराम विश्नोई ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि सांभर झील क्षेत्र में प्रवासी पक्षियाें की मौतों के बाद भविष्य में प्रभावी कार्यवाही एवं निगरानी रखने हेतु राज्य सरकार द्वारा राज्य आर्द्र भूमि प्राधिकरण तथा अंतर्विभागीय स्टेंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौतों की वन विभाग, पशुपालन विभाग, नगरपालिका नावां एवं सिविल डिफेंस टीम ने संयुक्त रूप से परीक्षण किया। टीम ने पक्षियों की गिनती की, मृत पक्षिओं को दफनाया और रेस्क्यू किया। 



 

 विश्नोई प्रश्नकाल में इस संबंध में विधायकों द्वारा पूछे गये पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सांभर झील तीन जिलों अजमेर, जयपुर और नागौर में फैली हुई है। अजमेर में एक भी पक्षी की मौत नहीं हुई। जयपुर जिले से सबसे पहले सूचना मिली और वहां सबसे पहले टीम भेजी गई। उन्होंने बताया कि प्रवासी पक्षियों को खाने-पीने की व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सांभर क्षेत्र की जमीन वन विभाग की नहीं है, बल्कि राजस्व भूमि है, जिसका कुछ भाग सांभर साल्ट को तथा कुछ भाग चंद्रा कंपनी को होटल बनाने के लिए लीज पर दिया गया है। 

 

इससे पहले विधायक  निर्मल कुमावत के मूूल प्रश्न के जवाब में विश्नोई ने बताया कि सांभर झील में विगत वर्ष में प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों की मौत हुई हैं। 10 नवम्बर 2019 को स्थानीय सूत्रों से सूचना प्राप्त होने पर जिला प्रशासन, पशुपालन विभाग तथा वन विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से क्षेत्र का निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही की गई। 11 नवम्बर 2019 से रेस्क्यू कार्य प्रारम्भ किया गया। 

 

उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा इस संबंध में विस्तृत जांच की गई है। पक्षियों की मृत्यु का कारण एवियन बोटुलिज्म पाया गया। इस प्रकार की त्रासदी से पर्यटन पर विपरीत प्रभाव पड़ने के कोई अधिकारिक आंकड़े उपलब्ध  नहीं है। 

 

उन्होंने बताया कि प्रभावी कार्यवाही एवं निगरानी रखने हेतु राज्य सरकार द्वारा राज्य आर्द्र भूमि प्राधिकरण तथा अंतर्विभागीय स्टेंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने संग्रहित मृत पक्षियों एवं रेस्क्यू किये गये पक्षियों का विवरण सदन के पटल पर रखा।