दालों के वितरण का सबसे बड़ा अभियान

 


नई दिल्ली, 25 अप्रेल,  देश में तीन महीने के लिए लगभग 2 करोड़ परिवारों को एक-एक किलो दाल का वितरण करने के लिए दालों के परिवहन और पिसाई का बड़े पैमाने पर अभियान चल रहा है।


इस संकट काल में लोगों की प्रोटीन की जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत तीन महीने के लिए प्रत्येक खाद्य सुरक्षा अधिनियम परिवार को एक किलो मिल द्वारा पीसी और साफ की हुई दाल उपलब्ध कराने का फैसला किया था।


      केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग के मार्गदर्शन में नाफेड द्वारा निष्पादित इस अभियान में केंद्रीय / राज्य भंडारण निगमों के गोदामों से अन-मिल्ड दालों को उठाया जाना है और भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार दाल मिलों में पिसाया और साफ कराया जाना है और फिर मिलों से दालों को राज्यों तक पहुंचाया जाना है। उसके बाद दाल के दानों को वितरण के लिए सरकारी गोदामों और फिर पीडीएस दुकानों को ले जाया जाना है।


      मिलों का चयन नाफेड द्वारा ऑनलाइन नीलामी के माध्यम से आउट टर्न रेशियो (ओ टी आर) बोलियों के आधार पर किया जाता है। ओटीआर बोली में सफाईमिलिंगपैकिंगतथा आवक और जावक दोनों परिवहन के खर्चों को देखते हुए प्रति क्विंटल कच्ची दाल के पिसी हुई दाल के प्रतिशत को उद्धृत करना होता है।


पैकिंग 50 किलोग्राम बैग में होती है। मिलर्स को कोई मिलिंग चार्ज नहीं दिया जाता। मिलर्स के खंडों में समूह बनाए जाते हैं। उत्पादक राज्यों में स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल और मिलर्स को वरीयता दी जाती है। राशन की दुकानों तक ले जाने के आकस्मिक खर्चों सहित समस्त लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाती हैं।


      इस अभियान का पैमाना खाद्यान्न परिवहन से कहीं अधिक बड़ा और जटिल है। प्रत्येक किलो दाल ट्रकों  के कम से कम तीन (कई मामलों में चार) फेरों और लोडिंग और अनलोडिंग के कई चक्रों से गुजरती है। हालांकि लंबी दूरी के लिए माल ट्रेन के माध्यम से परिवहन किया जाता है मगर ज्यादातर मामलों में परिवहन ट्रकों के माध्यम से सड़क से होता है।


इस प्रक्रिया में लगभग 8.5 लाख मीट्रिक टन अन-मिल्ड दालों का परिवहन करके कोई 5.88 लाख मीट्रिक टन मिल्ड/साफ की हुई दालें नागरिकों को वितरित की जाएगी। सरकार ने इस योजना के लिए देश भर में लगभग 165 नाफेड गोदामों में उपलब्ध स्टॉक का उपयोग करने की अनुमति दी है। नाफेड ने देश भर में 100 दाल मिलों को अब तक इस काम में लगाया है।


      प्रत्येक महीने राशन की दुकानों के माध्यम से देश के खाद्य सुरक्षा अधिनियम परिवारों को 1.96 लाख मीट्रिक टन दालों के वितरण की आवश्यकता होती है। राज्य सरकारों/केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को लगभग तीन-चौथाई (1.45 लाख मीट्रिक टन से अधिक) पिसी और साफ़ की गई दालें देने की पहले ही पेशकाश की जा चुकी है। अपने अधिकार क्षेत्र में दाल मिलों वाले कई राज्यों को इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए खुद से पिसी हुई दाल को उठाने के लिए कहा गया है।


      राज्यों और संघ शासित प्रदेशों ने मासिक आवश्यकता का एक तिहाई वितरण के लिए अंतिम छोर तक ले गए है। 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों- आंध्र प्रदेशअसमछत्तीसगढ़दिल्लीहरियाणाहिमाचलप्रदेशमहाराष्ट्रमेघालयअरुणाचल प्रदेशअंडमानचंडीगढ़ओडिशापंजाबराजस्थानसिक्किमतमिलनाडुतेलंगाना ने वितरण शुरू कर दिया है।


कई अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने सामाजिक दूरी और सार्वजनिक सुरक्षा के कारणों को देखते हुए मई के पहले सप्ताह में खाद्यान्न वितरण के साथ ही दालों का वितरण करने का निर्णय लिया है। हालांकि आज की तारीख तक लगभग 30,000 मीट्रिक टन दालों का वितरण किया जा चुका है लेकिन मई के पहले सप्ताह में इसमे तेजी आएगी।


अनेक राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशोंविशेष रूप से अंडमानचंडीगढ़दादरा नगर हवेलीगोवालद्दाखपुडुचेरीलक्षद्वीप जैसे छोटे राज्यों और यहां तक ​​कि पंजाब को एक ही बार में सभी तीन महीनों के लिए पिसी और साफ की हुई दाल प्रदान की गई है।


      उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की मदद से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशोंनाफेडदाल मिलों और वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के बीच समन्वय रखने के लिए संयुक्त सचिवों के नेतृत्व में अधिकारियों के पांच समूहों की स्थापना की है। कृषि सचिव और उपभोक्ता मामले के सचिव संयुक्त रूप से दैनिक आधार पर प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं और जमीनी स्तर की बाधाओं को दूर कर रहे हैं। कैबिनेट सचिव व्यक्तिगत रूप से वितरण पर प्रतिदिन नज़र रख रहे हैं।


      यह पहली बार है कि जब उपभोक्ता मामलों का विभाग दालों का इतना बड़ा संचालन कर रहा है। इस ऑपरेशन में 4 सप्ताह की अवधि में लगभग दो लाख ट्रकों के फेरे लगने हैं  और उनकी लोडिंग और अनलोडिंग होनी है। सामान्य समय में भी यह महत्वाकांक्षी काम हैलेकिन हॉटस्पॉट क्षेत्रों में स्थित कई दाल मिलों और गोदामों के साथ लॉक डाउन के दौरान ऐसा करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षित रूप से संचालन का प्रबंधन महत्वपूर्ण है। ऐसे क्षेत्रों में लोडिंग और अनलोडिंग के लिए ट्रकों और श्रम की उपलब्धता एक बड़ी समस्या रही है।


      अधिकांश लाभार्थियों को अप्रैल में या अधिकतम मई के पहले हफ्ते में पहले महीने के का कोटा प्राप्त हो जाएगा। कई राज्य / केंद्र शासित प्रदेश एक बार में ही तीन महीनों की  दालें वितरित कर सकेंगे। शेष राज्यों के लिए मई में ही सभी तीन महीनों के लिए वितरण को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा हैसंभवतः मई के तीसरे सप्ताह के भीतर। उपभोक्ता मामलों के सचिव द्वारा 24 अप्रैल2020 को राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों की तैयारी की समीक्षा की गई। तैयारियों पर संतोष व्यक्त करते हुए उपभोक्ता मामलों के सचिव ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को उनके सहयोग और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और आशा व्यक्त की कि आने वाले सप्ताह में वितरण को आगे बढ़ाया जाएगा।