कुरूक्षेत्र में आज किसान तय करेंगे रणनीति


कुरूक्षेत्र:हरियाणा:8 अक्टूबर । राष्ट्र एक बाजार के कानून के सम्बन्ध में राजस्थान से किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट  किसान संगठनों की कार्यशाला में हिस्सा लेने के लिए कुरूक्षेत्र पहुंच गये है ।



 रामपाल जाट ने कहा कि किसानों मेंं न्यूनतम समर्थन मूल्य का उल्लेख नहीं होना एवं न्यायपालिका की परिधि से बाहर करने का चुभता हुआ दर्द हैं । किसानों को उनकी उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित करना अन्यायकारी हैं । प्रधानमंत्री न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्रणाली को न्यायोचित मानते हैं, जिसकी घोषणा वे निरन्तर कर रहे हैं। उसके उपरांत उन्हीं की सरकार ने तिलहन एवं दलहन की उपजे मूंग, उड़द,अरहर,चना, मंसूर, मूंगफली, सोयाबीन, सरसों, कुसुम,की कुल उत्पादन में से 75 प्रतिशत खरीद को न्यूनतम समर्थन मूल्य की परिधि से बाहर कर दिया है और उस योजना का नाम भी प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान रखा है।


जाट नेकहा कि संरक्षण के नाम पर कुल्हाड़ी चलाने का कार्य किया है जिससे प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता सन्देह के घेरे में है।इस कारण उनकी मौखिक घोषणा पर किसानों को विश्वास नहीं हो रहा है।इस लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाना अपरिहार्य है ।किसानों को उनकी उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य तभी प्राप्त हों सकेंगे जब घोषित समर्थन मूल्य पर दाने-दाने की खरीद सुनिश्चित हो।


उन्होने कहा कि इस कानून का प्रारुप किसानों द्वारा तैयार किया गया जिसका नाम किसानों की सुनिश्चित आय एवं मूल्य का अधिकार विधेयक-2012 हैं।इसके आधार पर 8 अगस्त 2014 को एक निजी विधेयक को लोकसभा द्वारा सर्वसम्मति से विचारार्थ स्वीकार किया गया था,किन्तु अभी तक केंद्र सरकार ने उसके आधार पर कानून बनाने की कोई पहल नहीं की।


किसान नेता ने कहा कि अभी भी केंद्र सरकार के पास उचित समय है जब इस प्रकार का कानून बनाया जा सकता है।अन्याय निवारण के लिए भारत की जनता न्यायालय पालिका के उपलब्ध विकल्प को ही श्रेष्ठ मानती है। इस हेतु शीघ्र, सुलभ एवं नि:शुल्क न्याय के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर कृषि न्यायालयों की स्थापना किया जाना सार्थक कदम रहेगा।


उन्होने सुझाव देते हुए कहा कि इससेे किसान न्याय प्राप्ति की परिधि से बाहर नहीं होंगे।
वर्तमान में सरकार और किसानों के बीच टकराव को रोकने के लिए यह मार्ग उपयुक्त हो सकता है।