पणजी , 25 नवम्बर । आमतौर पर ब्राजील का हमारे देश में फुटबॉल और साम्बा नृत्य के पर्याय के रूप में इस्तेमाल होता है, लेकिन सोमवार को आईएफएफआई स्थल पर 'उमा- लाइट ऑफ हिमालय' पर हुई गहन चर्चा के दौरान इस देश का नाम आध्यात्मिकता, संस्कृति और फिल्मों के साथ गुंजायमान हुआ।
इस फिल्म के निर्देशक आनन्द ज्योति ने कहा,'मेरी फिल्म में आरंभ, मध्य या अंत जैसी निश्चित संरचना नहीं है। यह एक दृश्यात्मक (विजुअल) तीर्थयात्रा है।' उन्होंने कहा कि गंगा नदी इस फिल्म की नायिका है और मैं इसे सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देखता हूं। गंगा एकमात्र ऐसी नदी है, जिसे पूरी दुनिया में इस रूप में पूजा जाता है।
आनंद ने कहा कि हालांकि भारत एक प्राचीन देश है और ब्राजील उसकी तुलना में नया राष्ट्र है, इसके बावजूद इन दोनों देशों में साझा करने के लिए बहुत कुछ है। उन्होंने कहा, 'ब्राजील वासी भारतीय संस्कृति का स्वागत करते हैं। ब्राजील में फिल्म समारोहों के दौरान भारतीय फिल्मों को बहुत पसंद किया जाता है।'
आनंद ने कहा कि वह भारत में ब्राजील का फिल्म महोत्सव का आयोजन करने के बारे में विचार कर सकते हैं और इस बारे में जो भी आगे आएगा, वह उसे हरसंभव सहायता देंगे। श्री आनंद 2012 से ब्राजील में भारतीय फिल्म समारोहों का आयोजन करते आ रहे हैं।
उन्होंने कहा,'ब्राजील की फिल्मों के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि वहां कोई सेंसर बोर्ड नहीं है। मुझे लगता है कि यह बात सबसे अच्छी है। यहां सभी फिल्मकारों को इसी की चिंता सताती है। हमें थोड़ी सी ढिलाई बरतने की जरूरत है।'