स्पीकर को संविधान से मिली शक्तियों का पूरा उपयोग करना चाहिए

 

जयपुर, 29 फरवरी। उड़ीसा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सूर्यनारायण पत्रो ने संविधान की दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत अध्यक्ष की भूमिका पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्पीकर को संविधान से मिली शक्तियों का पूरा उपयोग करना चाहिए।

 

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (राजस्थान शाखा) के तत्वावधान में शनिवार को विधानसभा में आयोजित सेमिनार के प्रथम सत्र में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए डॉ. पत्रो ने कहा कि राजनीतिक व्यवस्था में स्थिरता के लिए 52वें संविधान संशोधन के माध्यम से दलबदल कानून लाया गया।

 

स्पीकर को दलबदलू सांसद या विधायक को अयोग्य ठहराने के संबंध में निर्णय करने का अधिकार दिया गया। इसके उद्देश्य की सही ढंग से प्राप्ति नहीं हो सकी है। हाल ही में कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में सरकार गठन के दौरान इस पर काफी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर दलबदलू सदस्य को अयोग्य ठहराने की शक्ति स्पीकर से लेकर ट्रिब्यूनल बनाने के संबंध में राय देने को कहा है। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने राजस्थान, उड़ीसा एवं कर्नाटक विधानसभा अध्यक्षों की एक समिति का गठन किया है।

 

उन्होंने कहा कि वह स्वयं इसके पक्षधर हैं कि स्पीकर संविधान से मिली शक्तियों का समुचित उपयोग करें, लेकिन उन्हें न्यायिक शक्तियां नहीं होनी चाहिए।